पेट्रोल पम्प आज से पुनः आरम्भ हो गया है-22.11.12

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जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 22 नवम्बर 2012.
परम् पूज्य गुरू महाराज (बाबा जयगुरूदेव जी महाराज) की अपार दया से जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के द्वारा संचालित जयगुरूदेव पेट्रोल पम्प आज से पुनः आरम्भ हो गया है। पेट्रोल पम्प चालू होने पर सर्वप्रथम दादागुरूजी महाराज की प्लाईमाउथ गाड़ी में तेल भरा गया, उसके पश्चात वहां पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए गाडि़यों की लाइन लग गई।
मुसलमान भाइयों की किताब में आला फकीर शम्स तरबेज का जिक्र आता है कि उन्होंने मरे हुए बादशाह के लड़के को जिन्दा कर दिया था। उन्होंने लाश को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘खुदा के हुक्म से उठ जा’’ किन्तु लड़का लेटा रहा। दोबारा उन्होंने यही कहा कि ‘‘खुदा के हुक्म से उठ जा’’ फिर भी लाश में कोई हरकत नहीं हुई। फिर तीसरी बार उन्होंने आदेश के स्वर में कहा कि ‘‘मेरे हुक्म से उठ जा’’ यह कहते ही लड़का उठकर बैठ गया। बादशाह खुश हो गया किन्तु मुल्ले-मौलवीयों ने एतराज किया कि खुदा से ऊपर कोई शक्ति नहीं जो यह चमत्कार दिखा सके।
फकीरों-महात्माओं को दुनियां के लोगों ने तकलीफें बहुत दीं। ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया, मोहम्मद साहब को अथवा राम, कृष्ण, कबीर, रैदास आदि अनेक संतों-महात्माओं को परेशान किया। कबीर साहब को इतना परेशान किया कि काशी छोड़कर मगहर चले गए और वहीं पर शरीर को त्याग दिया। बाबा जयगुरूदेव महाराज को अकारण आपातकाल में जेल भेज दिया गया, तन्हाई दी, हथकड़ी-बेंड़ी पहनाई और जान से मार डालने की भी कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। आज बाबाजी का हथकड़ी-बेड़ी का क्रास देश में जगह-जगह प्रेमियों के घर में दिखाई दे रहा है। बाबाजी ने एक बार कहा था कि मैं महात्मा गांधी नहीं हूँ कि गोली से उड़ा दोगे। गांधी जी राजनीति से जुड़े थे और मैं धर्म के रास्ते से चलकर परिवर्तन करके दिखा दूंगा। महात्माओं का खेल इन्सान नहीं समझ सकता है। जिसको जना दें वहीं जान सकता है। रामायण में लिखा है किः-
सोई जानई जेहि देहु जनाई,
जानन तुमहिं तुमहिं होई जाई।
ये शब्द भगवान राम के लिए ऋषियों-मुनियों ने कहा है।
इस्तलिपि संदेश
नामधन अमोलक है, गुरूकृपा द्वारा मिलता है। सच्चा नाम धुनात्मक गुरू ही मिलेगा। सच्चे नामधन को पाकर सुरत अपने देश में नामडोर पकड़कर चढ़ती है। धीरे-धीरे अभ्यास करने से अन्तःकरण का मैल कटता है। अन्दरूनी ताकत धीरे-धीरे सहन होती है। एक बार ऊपर से ताकत व आनन्द गुरू छोड़ दें तो आनन्द पाकर साधक मस्त हो जाएगा। घर के कामों की लापरवाही करेगा। इसलिए गुरू अन्दरूनी नामधन का नशा साधक को धीरे-धीरे चढ़ाते हैं कि नशा हजम हो जावे। घर के काम काज का भी नुकसान न हो और साधक भजन में लगा रहे। गुरू से पूरी प्रीत करनी पड़ेगी। एक क्षणमात्र गुरू को मत छोड़ो।
जयगुरूदेव सत्संग
यह धरती धर्मभूमि है। धर्म की कहानियां लिखी गई हैं। समय-समय पर संत-फकीर औतारी शक्तियां भारत में आती रहीं। राम,कृष्ण, कबीर, नानक, शंकराचार्य आदि आए। अपने-अपने समय में उन्होंने जीवों को जगाया, चेताया। उनकी धर्म पुस्तकों में बड़ा ज्ञान छिपा है, त्याग भरा है, बैराग, सत्यता, प्रेम और अहिंसा परमोधर्मः का संदेश भरा हुआ है।
जब-जब सामाजिक स्थिति पारिवारिक स्थिति राज्य की स्थिति गिर चुकी है तो ऐसे समय में उन शक्तियों का आना होता है। जब हम सब लोग मानवधर्म छोड़ देते हैं, नैतिकता छोड़ देते हैं तो वह शक्तियां आती हैं हमें उठाने के लिए तरह के प्रयास करती हैं। महात्माओं के पास कोई न कोई ज्ञान, कोई न कोई शक्ति छिपी हुई है, वह कुछ न कुछ ज्ञान कुछ न कुछ शक्ति देकर जीवों को उठाते हैं। कोई वस्तु है जो न मालूम कहां चली गई, खो गई। उसे खोजने की चेष्टा करो, आनन्द और प्रेम पाने के लिए भांति-भांति के प्रयास करते हैं ताकि आपको खोई वस्तु मिल जाए जिसे आप खोज रहे हैं।
आपने उसे खोजने के लिए धन बटोरा, दौलत बटोरी, घर-परिवार बनाया, विद्या पढ़ा जब वह वस्तु आनन्द आपको नहीं मिला तो अन्त में उन्हीं महात्माओं के पास आप जाते हो। उनके पास संतोष मिलता है, प्यार मिलता है, मानव धर्म मिलता है और आध्यात्मिक धर्म मिलता है खोजने वाले को कोई न कोई अवश्य मिल जाता है जो उसकी जिज्ञासा को शान्त करता है।

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